NUTRITION

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आपकी सेहत  को  चाहिए पोषण

अपनी उम्र के अनुसार  समुचित पोषक तत्वों  को खान पान से शामिल करना , जिसे हम  न्यूट्रीशन कहते हैं  ।  जब शरीर को आवश्यक मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाते तो  उसे कुपोषण कहते हैं ।

मनुष्य समेत सभी जीव जन्तुओं में उनके जैविक क्रियाओं के  लिए उर्जा की आवशयकता होती है । यह उर्जा भोजन से प्राप्त होती है । भोजन के द्वारा पोषक पदार्थों को पाचन ,अवशोषण ,और अपच पदार्थों का परित्याग करने की सम्पूर्ण परिक्रिया को पोषण कहते हैं । उर्जा के बनने , कोशिकाओँ की टूट फूट की मरम्मत और वृद्धि के लिए आवश्यक पदार्थों को पोषक पदार्थ कहते हैं ।

क्या है पोषण और कुपोषण –शरीर के सपूर्ण विकास के लिए जिन पोषक तत्वों (प्रोट्रीन , कार्बोहाइड्रेट , मिनरल ,वसा और विटामिन  ) की आवश्यकता होती है  उन्हे पोषण कहते हैं ।

जब भोजन के रुप में शरीर को जरुरी पोषक तत्व नहीं मिल  पाते हैं , तो  उन्हे कुपोषण कहते हैं  । सही समय पर खाना न खाना भी कुपोषण का कारण बन सकता है । अत्यधिक चिकनाई वाला खाना खाने से भी कुपोषण की समस्या उत्पन्न हो जाती है ।

पोषण का मतलब है कि जो हम भोजन खा रहे हैं उसका हमारे शरीर में या हमारे शरीर के द्वारा सदुपयोग हो रहा है । न्युट्रीशन  में हमें प्रचुर मात्रा में विशेषकर बच्चों के लिए फल , हरी सब्जियां , दुध , अंडा ,साबुत अनाज , दालें , सोयाबीन , मीट  शामिल होना चाहिए । यह सब न्यूट्रीशन बढते बच्चों के विकास के लिए अतिआवश्यक है । पोषक तत्वों की कमी से आगे चलकर बच्चों में बोनापन , वजन कम होना  प्रतिरोधक क्षमता का कम होना ,आँखे कमजोर होना , शरीर का ठीक से विकास न करना आदि शामिल होता है ।

न्यूट्रीशन

एक स्वस्थ शरीर को उसके विकास के लिए पोषण की आवश्यकता होती है । जब एक बच्चा गर्भ मे होता है तब से उसके शरीर का निर्माण  या विकास होने लगता है ,शिशु का दिमाग ,हड्डी ,त्वचा  , बाल  आदि इन सबके विकास के लिए न्यूट्रीशन की आवश्यकता होती है  जो बच्चे को माँ के द्वारा प्राप्त होता है  । गर्भस्थ महिलाओं में पोषक तत्वों की कमी महिलाओं और उनके गर्भस्थ शिशुओं की सोहत पर बुरा प्रभाव डालती है ।

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आवश्यक पोषक तत्व-

प्रोटीन

यह पोषक तत्व एमीनो एसिड मे निर्मित होते हैं जो विभिन्न शारीरिक क्रियाओं  को समुचित रुप से संचालित करते हैं । गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रोटीन की ज्यादा आवश्यकता होती है । प्रोटीन के  कारण ही बच्चों और शिशुओं का शारीरिक विकास होता है । किशोरों व व्यस्कों मे प्रोटीन के जरिए शरीर में होने वाली कोशिकाओं की क्षति पूर्ति होती है । प्रोटीन हमें डेयरी उत्पाद ,अंडा ,सोया , मछली , साबुत अनाज ,  मीट से प्राप्त होता है ।

प्रोटीन बहुत कम ऊर्जा देता है  ,कोशिकाओं के निर्माण के लिए बहुत आवश्यक है  । प्रोटीन से 4.3 किलो कैलोरी ऊर्जा मिलती है । यह जटिल होता है इसका पाचन देरी से होता है । प्रोटीन का निर्माण 20 एमिनो एसिड से होता है  जो की हमें भोजन से प्राप्त होता है ।  शरीर मे 10 एमिनों एसिड मौजूद होता है बाकी का 10 हमें भोजन से मिलता है ।

वैसे तो हर व्यक्ति को प्रोटीन की आवश्यकता होती है  लेकिन किशोर और बच्चों को अधिक मात्रा में इसकी आवश्यकता होती है । इससे उनके शरीर का विकास होता है इसके अलावा प्रोटीन नई कोशिकाओं का निर्माण करता है ।कोशिकाओं को बनाने और सुधारने का भी कार्य करता है ।त्वचा , बाल , हडडियों , नाखूनों , शरीर की कोशिकाओं ,मांसपेशियों ,और अंगों को स्वस्थ रखने के लिए प्रोटीन अति आवश्यक है ।

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विटामिन

विटामिन शरीर के विकास में सहायता करता है ,इससे इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है तथा कई बीमारियों से दूर रखता है । इसकी कमी से कईतरह की बीमारी का सामना करना पङ सकता है । विटामिन की कमी से रतोधीं जैसी बीमारी हो सकती है ।

हमारे शरीर में 12 प्रकार के विटामिन पाये जाते हैं  विटामिन की खोज काशिमीर  फंक ने की थी । विटामिन  जो हमारे शरीर मे पाये जाते हैं वो इस प्रकार से हैं। विटामिन A, B ,C ,D ,E and VIT K

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आदि ।

विटामिन ए – यह प्रतिरक्षी  विटामिन भी होता है । इसका रसायनिक नाम रेटिनाल है । यह फेट साल्यूबल विटामिन होता है ।

इसका मुख्य काम – हमारी हड्डियों तथा मांसपेशियों को मजबूती देता है । यह खून में कैल्शियम के संतुलन को बनाये रखता है ।

मुख्य स्रोत –इसके मुख्य स्रोत होते हैं पीला फल जैसे पपीता , केला , चना ,पका आम  आदि ।

इसकी कमी से आँखों के रोग जैसे रतौंधी हो जाता है । इस बीमारी ममें रोगी को रात को दिखना बंद हो  जाता  है ।

विटामिन बी1– रसायनिक नाम थाइमिन होता है  । यह पानी में घुलनशील होता है ।

इसका मुख्य कार्य हमारे मष्तिस्क को स्वस्थ रखने के लिए बहुत ही उपयोगी होता है । इसकी कमी से बेरी बेरी और त्वचा रोग होता है ।

मुख्य स्रोत –अंडा ,सुरजमुखी के बीज ,अनाज और संतरे में पाया जाता है ।

विटामिन बी2 –इसका रासायनिक नाम राइबोफ्लेविन होता है । यह पानी मे घुलनशील होता है ।

इसका मुख्य कार्य त्वचा को अच्छा  रखने के लिए बहुत ही उपयोगी है ।

इसकी कमी से होने वाले  रोग होते हैं –त्वचा का फटना ,आँख का लाल होना , जीभ का फटना ।

स्रोत –केला ,दूध , दही , अंडा ,हरी बीन्स और मछली ।

विटा बी 3- इसका रसायनिक नाम नियासिन होता है । इसका मुख्य कार्य ब्लड प्रेशर को कन्ट्रोल करना होता है ।

इसकी कमी से  समय से पहले बालों का सफेद होना , मंद बुद्धि होना होता है ।

स्रोत –खजूर ,दुध ,अंडा ,गाजर , मूंगफली होता है ।

विटा बी5–  इसका रसायनिक नाम पेंटाथोनिक एसिड होता है । यह पानी में घुलनशील है ।

मुख्य कार्य –इसका मुख्य कार्य है यह बालों को स्वस्थ रखता है ,और स्वस्थ होने से बचाता है । इससे तनाव भी कम होता है । इसकी कमी से पेलाग्रा 4डी सिन्ड्रोम होता है ।

इसके मुख्य स्रोत हैं – मुंगफली ,आलू , टमाटर ।

विटामिन बी6 –इसका रसायनिक नाम प्यरीडाक्सीन  है ।

इसका मुख्य कार्य – यह थकान ,तनाव ,अनिद्रा से मुक्ति देता है ।

इसकी कमी से होने वाले रोग – एनिमीया , त्वचा रोग ।

मुख्य स्रोत –माँस ,केले .अनाजऔर सब्जियां ।

विटामिन 9- फालिक एसिड

मुख्य कार्य –यह त्वचा के रोग और गठिया के उपचार हेतु बहुत ही सहायक है ।

रोग –एनिमीया , पेचिश रोग ।

मुख्य स्रोत –दाल , सब्जियां ,सुरजमुखी के बीज ,फलों मे होता है ।

बी 12-सायनोसोबलमीन

मुख्य कार्य –यह एनीमिया और मुँह में अल्सर जैसी बीमारियों को दूर करता है ।

रोग –एनिमीया और पांडु रोग

मुख्य स्रोत –मांस कलेजी दूध और दूध से बनाये गये उत्पाद ।

विटमिन सी –एस्कार्बिक एसिड

मुख्य कार्य – यह हमारी त्वचा और हड्डियों के लिए ,और घाव को ठीक करने मे बहुत ही सहायक है ।

रोग – इसकी कमी से होने वाले रोग-स्कर्वी ,मसुडों का फुलना ।

मुख्य स्रोत –आँवला ,निम्बू ,संतरा ,नारंगी ,टमाटर और खट्टे फलों मे पाया जाता है ।

विटामिन डी – इसका रासायनिक नाम  केल्सिफेरोल है ।

इसका मुख्य कार्य –  इसका मुख्य कार्य हमारे शरीर में कैल्सियम को अवशोषित करता है तथा प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है  तथा दाँतो की सडन को रोकता है ।

रोग –इसकी कमी से सूखा रोग तथा रीकेट होता है ।

स्रोत – सूर्य का प्रकाश ,अंडे की जर्दी , दूध ।

वविटामिन इ- इसका रसायनिक नाम टेकोफेरोल है ।

इसका मुख्य कार्य होता है इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना ।

मुख्य स्रोत – वनस्पति तेल , अनाज , बादाम ,अंडा ,दूध ।

रोग –इसकी कमी से होने वाले रोग जनन शक्ति का कम होना ।

विटामिन के – इसका रसायनिक नाम फीलोक्वीनोने है ।

मुख्य कार्य – यह स्वस्थ हड्डियां  और उनके लिए प्रोटीन बनाकर हमारे शरीर की मदद करता है ।

रोग –रक्त का थक्का बनना ।

मुख्य स्रोत –टमाटर ,हरी सब्जियां ।

कार्बोहाड्रेट –

इससे शरीर को उर्जा मिलती है जो कई तरह के भोजन से प्राप्त होती है ।कार्बोहाड्रेट हमारे शरीर में उर्जा प्रदान करता है । कुछ कार्बोहाइड्रेट सजीवों के शरीर में रचनात्मक तत्वों का निर्माण करते हैं जैसे कि सेलयूलोज ,हेमीसेल्यूलोज , काइटिन तथा प्रेक्टिन  । जबकि कुछ ऊर्जा प्रदान करते हैं  जैसे कि मण्ड शर्करा ग्लूकोज , गलाइकोजिन  आदि । कार्बोहाइड्रेट स्वाद में मीठा होता है , यह शरीर में शक्ति  उत्पन्न करने का प्रमुख स्रोत है ।

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कार्बोहाइड्रेट कार्बनिक पदार्थ है जिसमें कार्बन हाइड्रोजन व आक्सीजन होते हैं । सर्वाधिक कार्बोहाइड्रेट गन्ना व चुकन्दर में पायी जाती है  ये आक्सीकरण के पश्चात शरीर में ऊर्जा प्रदान करते हैं  । 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट के आक्सीकरण से 4.2 किलो केलोरी ऊर्जा निकलती है ।  हमारे भोजन में से 50 से 75 प्रतिशत ऊर्जा कार्बोहाइड्रेट से आती है । यह तीन प्रकार के होते हैं  1 मोनोसेकेराइडस  2- डाइसेकेराइडस 3-पोलीसेकेराइडस ।

1-मोनोसेकेराइडस –

ये सिर्फ एक अणु के बने होते हैं ,यह कार्बोहाइड्रेट सबसे सरल होते हैं ।

ग्लूकोज यह मोनोसेकेराइड  होता है ,यह फलों और शहद में मुख्य रूप से पाया जाता है ।

यह शरीर को तुरन्त उर्जा प्रदान  करता है ।

फ्रक्टोज –फ्रक्टोज अन्य सेकेराइड की तुलना में धीरे धीरे शरीर की आन्त्र कोशिकाओं में अवशोषित होता है ।

डाइसेकेराइड- यह मोनोसेकेराइड के दो अणु से मिलकर बना होता है । इसका उदाहरण है सुक्रोज ,माल्टोज और लेक्टोज सुक्रोज पाया जाता है गन्ना ,चुकन्दर तथा मीठे फलों मे पाया जाता है । माल्टोज स्वतन्त्र रुप से नहीं पाया जाता है यह बीजों की शर्करा में पाया जाता है ।

लैक्टोज – यह कम मीठी होती है तथा पौधौं में पायी जाती है ।

पालीसेकेराइड –

यह अनेक  मोनोसेकेराइड अणुओं से मिलकर बना होता है । आवश्यकता पडने पर यह जल अपघटन द्वारा ग्लूकोज में विघटित होजाते हैं  इस प्रकार ये ऊर्जा उत्पाजन के लिए संग्रहीत ईधन का कार्य करते हैं । स्रोत मांड , स्टार्च अनाज तथा शकरकन्द में पायाजाता है ।

कार्बोहाइड्रेट की अत्यधिक मात्रा लेने से मोटापा बढ जाता है तथा पाचन संबंधी रोग उत्पन्न होजाते हैं ।

मिनरल्स –

हम हमेशा विटामिन्स ,कार्बोहाड्रेट और प्रोटीन्स की बात करते हैं  लेकिन मिनरल्स भी हमारे लिए बहुत उपयोगी होते हैं ।

मिनरल्स की आवश्यकता  हमें शरीर के कई कार्यों , अंगों को स्वस्थ रखना ,मांसपेशियों  तथा लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण करता है । मिनरल्स जिसे हम खनिज पदार्थ भी कहते हैं की आवश्यकता मस्तिष्क और विभन्न अंगों के बीच संदेशों का आदान प्रदान करता है ।  आक्सीजन को विभिन्न अंगों तक पहुँचाने का कार्य करता है । यह सब मिनरल्स की संतुलन के कारण हो पाता है । हमारा शरीर खनिज पदार्थों का निर्माण नहीं करता है इसे हमे भोजन से प्राप्त करते है  ।

पोषक दो प्रकार केहोते हैं – मैक्रोन्यूट्रीएंटस और माइक्रोन्यूट्रीएंटस  । मैक्रो मे प्रोटीन वसा और कार्बोहाइड्रेट आते हैं । माइक्रो में विटामिन्स और मिनरल्स आते हैं ।

विटामिन्स आर्गेनिक होते हैं और उष्मा , वायु , या एसिड से टूट जाते हैं  जबकि मिनरल्स इनआर्गेनिक होते हैं जो अपनी रासायनिक संरचना बनाये रखते हैं  ।

क्यों जरूरी है – हम जिस भोजन को  लेते हैं वो मेटाबालिक क्रियाओं के द्वारा ऊर्जा में बदलता है इसके लिए और शरीर को ठीक से कार्य करने के लिए मिनरल्स की आवश्यकता होती है ।

कमी- इसकी  कमी से  कोशिकाओं का निर्माण नहीं हो पाता है और भी बहुत सी समस्यायें उत्तपन्न हो जाती है ।जैसे नाखून का कमजोर पङ जाना ,नींद न आना , जोडों का दर्द , हीमोग्लोबीन का कम हो जाना , इसकी कमी से क्वाशियोरकर नामक बीमारी हो जाती है  ।

यह बीमारी बच्चों और व्यस्कों दोनो को हो सकती है । लोकिन प्रोटीन की कमी से यह  रोग बच्चों मे होजाता है । क्वाशिओरकर भोजन में प्रोटीन की कमी से होने वाला रोग है इसको प्रोटीन कुपोषण के नाम से भी जाना जाता है ।

कैल्सियम – यह हमारे शरीर में पाया जाने वाला मिनरल्स है । हड्डियों और दांतो में प्रचुर मात्रा में कैल्सियम पाया  जाता है । इनमें यह 90 प्रतिशत तक मौजूद रहता है  बाकी 10 प्रतिशत कैल्शियम खून ,शरीर के तरल पदार्थ में  नसों मांसपेशियों की कोशिकाओं और उतकों मे मौजूद होता है ।  मनुष्य को जीवित रहने के लिए कैल्शियम एक जरूरी  मिनरल है ।  भोजन में कैल्शियम का होना बहुत जरूरी होता है । इसको माइक्रोन्यूट्रीन्टस भी कहा जाता है । हर उम्र के व्यक्ति के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी होता है ।

स्रोत –कैल्शियम दूध ,पनीर , अंडा ,सोयाबीन , बादाम , तिल , हरे पत्तेदार सब्जियां, काजु ,आंवला आदि  में कैल्शियम मौजूद होता है ।

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कमी –कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और आस्टियोपोरेसिस नामक रोग होने का खतरा बढ जाता है । इसकी अधिकता से बी पी और पथरी की समस्या होजाती है । डिप्रेशन ,अनिद्रा ,डिमेशिया भी कैल्शियम की कमी से होजाते हैं ।

मांस पेशियों के संकुचन को कम करता है । खुन को बहने से रोकने में सहायक होता है । सामान्य चोट को बहनेसे रोकने के लिए कैल्शियम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।

जल – यह सुनना आम  बात है कि जल हमारे स्वास्थ्. के लिए कितना आवश्यक है ।

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जल आवश्यक क्यों है – यह हमारे शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आवश्यक होता है  जैसे जल हमारे शरीर के तापमान को नियन्त्रित रखता है । शरीर की गंदगी को बाहर निकालता है ।शरीर के रक्त प्रवाह और मस्तिष्क के कार्य में मदद करता है । यह लार का मुख्य घटक है  । लार में एंजाइम और इलेक्ट्रोलाइट की छोटी मात्रा होती है । जल ठोस भोजन को तोङने  और मुँह को स्वस्थ रखने में भी आवश्यक है । जल के और भी कार्य हैं जैसे -1 यह शरीर के तापमान को नियन्त्रित रखता है । 2-यह रीढ की हडडी और जोडों की सुरक्षा करता है । 3- पानी से शरीर के विषैले तत्व  मूत्र पसीने ,और मल के द्वारा बाहर निकलते हैं । 4- इससे कब्ज की समस्या भी दूर होजाती है । 5-यह वजन कम करने में मदद करता है । 5- पानी पीने से हमारा दिमाग बेहतर काम करता है ।हमारे दिमाग की क्षमता बढती है । इसका कारण यह है कि हमारे मस्तिष्क का 75 से 85 प्रतिशत भाग पानी होता है । इससे पानी पीने से हमारे दिमाग को शक्ति मिलती है । 6 –दिल को स्वस्थ रखने का कार्य करता है  पानी पीने से आक्सीजन की मात्रा बढ जाती है । यह रक्त परिसंचरण में सुधार करता है । 7- यह त्वचा को चमकदार बनाता है ।

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